Sunday, 13 November 2016

'दोपहरी की प्रार्थना'

पलकों के जवाब होठो पर लिखे मिले, और होठो के सवाल दिल में सिले मिले। मैं बहुत बार कहता रहा अपने यार से, कम रोया कर। हर बार उसके बाल मेरे तकिये पर उलझे उलझे मिले। 
हम मिले तो ऐसे कि रतजगों के किस्से बिखरे मिले, और जब जाने को उठे तो हाथो से हाथ सिले मिले। 
कब तक उसकी आँखों के किस्सों को याद करूँ, रब से दुनियाँ की सलामती की फरियाद करूँ; उससे पूछा तो बहुत देर तक चुप रहा। फिर बोला जब तक मिले, ख़ुशी से मिलें, गुम होकर एक दूजे को ऐसे ढूंढेंगे मेले में कि दुनियाँ की सलामती की दुआओं में हमारे मिलने -खोने और फिर से मिलने के किस्से और हिस्से मिलें।

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