Sunday, 18 September 2016

चाँद

रात के शामियाने में सोता है चाँद तुम्हारी झपकियों के तले , तैर कर बादलों को पार करता है एक दुनिया वो और आ बैठता है तुम्हारे तकिए के पास : सपनों की पहरेदारी में ।

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