हर शहर का एक फ्लेवर होता है, एक स्वभाव। स्वभाव जिसे वहाँ का भूगोल, इतिहास और सामाजिक तानाबाना निर्धारित करता है।
अजमेर; इस शहर में आप बांस की भांति रोपे हुए पाते है खुद को। यहाँ का भूगोल , इतिहास और लोक मनोविज्ञान इस तरह गुंथा हुआ है की आप ठीक ठीक किसी आदमी की तरह इसके व्यवहार और सामान्य प्रचालन को भांप सकते है।
बहुत पुराना है अजमेर, बारहवी शती के बाद से यह चर्चाओं में तो रहा। मगर स्थाई रूप से कभी किसी सत्ता की राजधानी नहीं रहा। पहले मुगल, फिर मराठा, और फिर अंग्रेज। सभी ने इसे अपनी सरकार के मुख्यालय के रूप में काम में लिया। यहाँ का स्थाई राजा न हुआ कोई। सो यहाँ के लोगों में नायकत्व के प्रति विशेष राग और लड़खड़ाती हुई उमस दिखेगी। चमत्कारों को यहाँ हाथो हाथ लिया जाता है, किसी चौराहे पर टोटके के अभिमन्त्रित नींबू, टोटम यहाँ आम है। सचिन पायलेट यहाँ से बिना पूर्व प्रयास के चुनाव जीत जाते है।
चूँकि यहाँ राज और सत्ता का स्थाई आवास नही बन सका। ठहराव यहाँ की विशेष भूमिका का मन्त्र है। कोई हलचल नही, बरसो एक ही दूकान से सामान लेने वाले लोग, एक ही रास्ते से जाने वाले लोग थोक में मिलेंगे। मानसिक चरित्र ऐसा की सोफिया से आगे सोचने का विचार उठता ही नही, सेंट जिस स्कूल के आगे लग गया वो बेहतर।
चूँकि प्रशासको ने एक तरफ़ा निर्माण करवाए यहाँ, सो शहर के प्रति उसके इतिहास के प्रति रूचि नगण्य मिलेगी। भारतीय इतिहास को उलट पलट कर देने वाले सैय्यद बन्धुओ का मकबरा है यहाँ ; अब्दुल्ला खान का। पर जानता कौन है इधर। मेंयो कॉलेज यहाँ के लोगो के लिए स्वप्न है, स्वप्न के भीतर स्वप्न है। सो लोककथाए बन जाती है आपे आप ; बॉबी देवल अपनी बहन को संभालने मेयो आया और सिगरेट खरीदने अमुक दूकान पर गया। जब बरसात फ़िल्म आई तो दुकानदार ने कहा ये लड़का मेरे यहाँ सिगरेट फूंकने आता था।
नागौर, टोंक, भीलवाड़ा जिलो से सटा है अजमेर( पाली से भी) मगर संस्कृतियों का संक्रमण नही हो पाया। सो शहर दो धड़ो में विभक्त हो चला है, वैशाली नगर की तरफ सभ्रांत वर्ग का निवास माना जाता है। बाकी गुजर धरती जैसे मोहल्ले भी है जो शहर के भीतर गाँव का लुक डेते है।
बाहरी पर्यवेक्षक आसानी से कह सकता है की यह थका हुआ उबासी लेता शहर है। रिटायरमेंट काटने के लिए मुफीद। मॉल , सिनेमाहाल आपको अपडेट होने से नाराज दिखेंगे। लड़कियाँ जिंस में खुद को सहज नही पाती है अधिकतर, उनके लिए लम्बा काजल लगाना चरम अभिव्यक्ति की तरह हैं। कहने को शिक्षा नगरी है, लडकिया आज भी प्ले स्कूल में 800 रुपये तनख्वाह में पढ़ाती मिल जाएगी।
बंधी हुई ऊर्जा का शहर, नीरवता का निशान।
होते है , ऐसे शहर भी।
'एक शहर'
Sunday, 18 September 2016
अजमेर
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society
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