चौधरी मैडम थी, उनका बालक मानसिक विमंदित था और हमारी ही स्कूल में पढता था। पता नही मैडम के पति क्या करते थे, कहाँ रहते थे। वो स्त्री स्कूल में अपने बेटे की शैतान लड़कों से रक्षा भी करती और पढ़ाने में भी ध्यान देती। स्कूल के बच्चे उनके पुत्र को बन्दर कह कर चिढ़ाते थे मगर मैडम बदले में किसी को मारती वारती नही थी, डांट देती थी।
वैसे मैडम बहुत अच्छा तो नही पढ़ाती थी, मगर बच्चे उनके घर परीक्षा से एक दिन पहले मुँह लटका कर पहुँच जाते तो इम्पोर्टेन्ट प्रश्नो के टिक लगा देती थी।
जो बच्चे सर्दियो में रुखा मुहँ लेकर स्कूल आ जाते थे, चौधरी मैडम उन बच्चों की माँ को उलाहना देते हुए पर्स में से बोरोप्लस निकाल कर क्लास में ही उनके मुहँ पर बोरोप्लस मसल देती थी।
उनकी बेटी भी हमारे ही स्कूल में पढ़ती थी, आश्चर्य ! उनकी बेटी को न कोई लड़का परेशान करता न गॉसिप बनती उसकी।
शायद स्कूल में चौधरी मैडम हमारी माँ थी।
ओ माँ , जहाँ भी हो प्लीज़ खुश रहना। आज आप बहुत याद आई।
Sunday, 18 September 2016
चौधरी मेडम
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हालाँकि 5 सितम्बर टीचर्स डे पर यह पोस्ट पढ़ी थी। पर फिर भी यहाँ इस ब्लॉग में इसे पढ़ने का अलग आनंद है । शायद ही कहीं न कहीं पीछे छूट चुकी अपनी उस अध्यापिका के प्रतिं स्नेह और आदर भी!
ReplyDeleteहालाँकि 5 सितम्बर टीचर्स डे पर यह पोस्ट पढ़ी थी। पर फिर भी यहाँ इस ब्लॉग में इसे पढ़ने का अलग आनंद है । शायद ही कहीं न कहीं पीछे छूट चुकी अपनी उस अध्यापिका के प्रतिं स्नेह और आदर भी!
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