Friday, 20 May 2016

लातूर का नमकीन पानी

बंगाल में कम्पनी सरकार का राज हुआ, बीस साल भी न बीते थे बक्सर की लड़ाई को और दुर्भिक्ष पड़ा, खुद अंग्रेज अफसरों ने ब्रिटेन पत्र लिखे कि इस मुल्क को हमनें इस हद तक बर्बाद कर दिया है कि बंगाल के अकाल में कुछ जगह पर लोगों ने मानव माँस खा कर जीवन बचाया है|

राज बदला , तो लगा खुद कि लोग खुद के लोगो से सम्वेदना रखेंगे , साथ गम बाटेंगे । स्वराज आएगा । स्वराज आने के लिए रवाना तो हुआ , मगर बीच रास्ते में ही रुक गया । लातूर तक नही पहुँच पाया । लातूर की ही बात नहीं है , राजस्थान में तो हर दूसरे बरस अकाल पड़ता है । कितनी हास्यास्पद बात है , नेशनल ग्रिड बन रहा है , ताकि बिजली का न्यायपूर्ण बँटवारा हो सके । बिजली न आएगी तो पसीना निकलेगा । मगर पानी नहीं होगा तो अर्थी उठेगी, जनाजा निकेलगा । विकास की किताब में बिजली के पन्ने के बाद पानी का पन्ना क्यों नहीं है । शहर के चेप्टर के बाद गाँव का चेप्टर क्यों नहीं है ।

कभी नहीं रखा गया , आज भी कोई नहीं रख रहा ।सत्ता सेल्फ और सेल्फ़ी में मग्न है |
प्रशासन उनके ट्विटर हैंडल हैंडल कर रहा है । कुछ आँखों का पानी सूख गया है , कुछ का रुकने का नाम नहीं ले रहा है ।

मीठा और आँखों का नमकीन पानी दोनों एक दूसरें छोर पर खड़े होकर एक दूसरें का इंतजार कर रहे है ।

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