Friday, 20 May 2016

जाति कभी नही जाती

जाति का मनोविज्ञान और व्यक्तित्व पर प्रभाव बहुत सूक्ष्म और मारक होता है । मेरा विश्वास कीजिए आप राजपूत हैं, और अगर हरिजन होते तो आपका यही व्यक्तित्व नितांत भिन्न होता । आप मोची हैं, और अगर ब्राह्मण होते तो यही आपका व्यक्तित्व भिन्न दिशा में यात्रा करता पाया जाता । एक और बात यह कि क्या कोई जातिवाद से मुक्त हो सकता है ?  जाति के प्रभाव से मुक्त होना अत्यंत विरल घटना है । जातिगत प्रभाव पुरुष को फिर भी थोड़ी ढील दे देते हैं , स्त्री का तो जीवन ही बदल देते है । एक ही कक्षा में पढ़े चार लड़के जो ब्राह्मण, राजपूत, बनिया, चमार हैं ।  पचास साल बाद उनका जीवन तौलिए । और ऐसी ही चार लड़कियों का जीवन तौलिए । स्त्री ज्यादा संकट में दिखेगी । स्वास्थ्य, जीवन शैली, मानसिक शांति जैसे विभिन्न पहलुओं के सापेक्ष ।
'जाति कभी नही जाती'

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