Thursday, 26 May 2016

मिर्ची का भाव

खबर है की महाराष्ट्र में एक टन प्याज बेचकर किसान को एक रुपया मुनाफा मिला बस ।
बात उन दिनों की है जब हमनें मिर्च लगाई थी खेत में । पहला तोड़ निकला आठ बोरी , दिन भर मिर्च तोड़ कर शाम को निजी मण्डी में पहुँचे तो भाव मिला बाइस रुपये किलो के हिसाब से । हम कोई पाँच सात लोग थे अलग अलग खेतों वाले । भाव सुनकर बहुत खुश हुए , और मिर्च तुलवा दी । एक एक व्यक्ति को पाँच से सात हजार रुपये मिले उस रात । पैसा गिन कर जेब में रखा और साथ वाले किसान लड़कों ने बीयर पी उस रात । घर लौटे और दुगुनी मेहनत और उम्मीद से अगले तोड़ में लग गए । दस बारह दिन बाद पिछली आठ बोरी की तुलना में इस बार तोड़ बैठा बाइस बोरी का । साथ वालों का भी ठीक ही बैठा । इस बार हमारी मिर्च की बोरियाँ एक की जगह दो ट्रेक्टर में लद कर गई । हाईवे के गाँवों में सड़क पर ही प्राइवेट मण्डियां लगती थी , पहली मण्डी पहुँचे तो भाव लग रहा था इस बार सिर्फ बारह रुपये किलो । किसी ने बताया अगली मण्डी में बीस चल रहा है , पहुँचे तो पता लगा सुबह बीस था । अभी माँग में कमी है सो आठ रुपये का भाव है । अजमेर मण्डी की मांग आनी बाकी थी सो अगली मण्डी वाले ने फोन पर बताया की आ जाओं दस तो लग ही जायेगा । हम तीसरी मण्डी पहुंचे । पिछली दोनों मण्डियों में एक बार फिर फोन लगाया रास्ते में से तो पता लगा की भाव उतर कर पाँच रुपये किलो रह गया है । तीसरी मण्डी पहुँचे डरते डरते । अजमेर मण्डी से कोई मांग न आई थी । हमें मिर्च तुलवानी पड़ी डेढ रुपये किलो में । कुल बारह सौ रुपये लेकर घर लौटे , उस रात साथ वाले किसानों ने खेत से निकलते वक्त बीयर पीने की योजना बनाई थी । मुझे याद है , लौटते लौटते हमे एक बज गया था , रास्ते भर एक आदमी न बोला , सब चुप चाप ट्रोली में बैठे पता नहीं क्या सोच रहे थे ।
संयोग से अगले दिन कस्बे में ठेले वाले से मिर्ची ली पाव भर आठ रुपये की , यानि बत्तीस रुपये किलो भाव में । बीच के साढ़े तीस रुपये कहाँ गए होंगे मैं नहीं जानता !

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