Thursday, 26 May 2016

जॉन अब्राहम ; अब'रहम करो जॉन

फरहान उर्फ़ जॉन अब्राहम ।
इस आदमी को पहली बार JGB  के एलबम में देखा था । गहरी आँखे , डिम्पल धँसा चेहरा ,लम्बा कद और तीखे कँधे । लगता था की यूनानी देवता की सन्तान है अखिलीज और हरक्यूलस की तरह ।
शारीरिक बनावट अपनी जगह है मगर जब आवारापन देखी तब निर्णय हुआ की जॉन बहुत उम्दा ऐक्टर भी है । जब करीना कपूर ने बिपाशा बसु को कहा की उसके बॉय फ्रेंड का चेहरा पत्थर की तरह का है , तभी से करीना दिल से उतर गई । कोई जा कर कहे उसे की फॉर्मल शर्ट में जॉन से बेहतर कोई फबता है क्या ? कौन मॉडल है जो सूट के साथ चप्पल पहन कर भी रेम्प से लेकर बॉलीवुड पार्टियो में पहुँच जाता है - और उन्हें रौंद भी देता है ।
मद्रास कैफे बना कर (प्रोड्यूसर) जॉन ने न केवल एक महत्वपूर्ण घटना पर बहुत हद तक सच्ची फ़िल्म बनाने का साहस किया है । कई फिल्मो में जॉन का होना ही जरुरी लगता है । धूम में जॉन हायबुसा का विकल्प थे और कस्बो में लड़को ने उसी किरदार से बाल रखकर बाइक्स दौड़ाई थी । धूम सीरीज में आमिर और जॉन के नेगेटिव किरदार की तुलना दिल पर हाथ रख कर करेंगे तो दूसरा हाथ जॉन के पक्ष में उठेगा । कोशिश कर लीजिए ।
ईसाई पिता और फारसी माता की संतान जॉन यूरोप और फारस के मध्य किसी जगह का मध्यकालीन लड़ाका सा लगता है जो भटक कर खेबर दर्रे से होता हुआ मुल्तान की दरगाहों में विश्राम करके वहाँ से नशीली आँखे उधार ले कर भारत आ गया ।
लव यू जॉन ,अब'रहम ( भी करो यार )

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