Friday, 20 May 2016

क्षेत्रीय पार्टियों का उठान

केंद्रीकरण और विकेंद्रीकरण भारतीय राजनीति के स्थाई तत्व है । सत्ता, शासन और राज्य इन तत्वों के बीच झूलता रहा है । गुप्त साम्राज्य के अतिशय दानपत्रों ने सामन्तवाद को बढ़ावा दिया और देश करीब सात सौ वर्षों तक स्थानीय क्षत्रपों के हाथ में चला गया । पिछले चुनाव में केंद्रीकरण की कोशिश हुई , मगर जैसे ही केंद्र ने अति केंद्रीकरण की कोशिश की , स्थानीय शक्तियाँ फिर से उठने लगी है । दिल्ली और बिहार के बाद अन्य राज्यों में क्षत्रप फिर से उठे है तो सन्देश साफ है , की बहुलतावाद की सांस्कृतिक विशेषता भारतीय राजनीति का भी अनिवार्य तत्व है ।
हम विशेष तरह की राष्ट्रीयता में रहते हैं । जहाँ एक भाषा, एक धर्म, एक संस्कृति जैसी संज्ञाओं का कोई काम नहीं है । अनेकता हमारी सामूहिक चेतना का एकल राष्ट्रवाद है ।
' राजनीतिक संस्कृति'

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