इस देश को छोड़ना कितना मुश्किल है, बात छोड़कर बाहर जाने की नही हैं। इस देश को अखिल रूप से स्मृतियों से बाहर करने की हैं। बहुत कोफ़्त होती हैं, लोगो की तटस्थता और अलसाया हुआ नजरिया देख कर। मगर फिर भी, प्रेम उमड़ आता है इन्ही लोगो पर। आप कितनी भी बौद्धिक प्रगति कर लें, कितनी भी चेतना का विकास कर ले। मगर साधारण से व्यक्ति के सम्पर्क में आते है, तो उसकी श्रम मिश्रित भावुक ग्लानियों में खुद को विद्यार्थी पाते है। बहुत मुश्किल लोग नही रहते भारत में, सरल भी है और टकटकी से चाँद को देखकर चांदनी की आस में रात काटने वाले भी है ये लोग।
बहुत सरल सा जीवन संघर्ष हैं यहाँ, फौरन हथियार डालकर प्रेम करने लग जाते है ये लोग। प्रेम भी ऐसा की एक बार जिसे चाह लिया, बस चाह लिया। बदले में जान देना छोटी चीज है, ये तो आपको अपना डर, अपनी शंका, अपना रुतबा सब दे देते हैं। प्रेम के बदले में।
छोटी सी जिंदगी है, उसी में अद्वैत से लेकर बुद्ध का क्षणिकवाद समझा देते है ये। जी कर स्वयं।
Wednesday, 21 September 2016
ये जो भारत है
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